Sunday, July 22, 2007

आंसू दिल के

वो थका हुआ मेरी बाहों में ज़रा सो गया था तो क्या हुआ
अभी मैंने ने देखा है चांद भी किसी शाख -ए -गुल पे झुका हुआ
जिसे ले गई है अभी हवा वो वरक था दिल की किताब का
कही आंसुओं से मिटा हुआ कहीं आंसुओं से लिखा हुआ

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